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उत्तराषाढ़ा नक्षत्र

Uttara Ashadha · 27 में से 21वाँ नक्षत्र

उत्तराषाढ़ा जन्म नक्षत्र: पक्की जीत, ऊँचे सिद्धांत और धैर्य से मिलती सफलता

इस नक्षत्र में जन्म

आपका जन्म नक्षत्र उत्तराषाढ़ा है, जिसे 'अंतिम विजय' का नक्षत्र कहा जाता है। इसके स्वामी सूर्य हैं और देवता विश्वेदेव, यानी सभी सद्गुणों के देवता। इसका चिह्न हाथी का दाँत या मचान है। इसलिए आपकी जीत देर से आती है, पर स्थायी होती है। आप सिद्धांतों के पक्के, ईमानदार, विनम्र और ज़िम्मेदार हैं। लोग आपकी बात पर भरोसा करते हैं, क्योंकि आप जो कहते हैं, वही करते हैं।

काम में आप प्रशासन, सरकारी सेवा, क़ानून और न्याय, सेना, प्रबंधन, शिक्षण, शोध और समाज के नेतृत्व वाले क्षेत्रों में अच्छा करते हैं। आपकी असली ऊँचाई अक्सर पैंतीस की उम्र के बाद आती है। धन ईमानदारी से और स्थिर रूप से जुड़ता है। रिश्तों में आप निभाने वाले और सम्मान देने वाले हैं, पर काम और सिद्धांतों के आगे भावनाएँ जताना भूल सकते हैं। सेहत में घुटने, जाँघ, पेट और हड्डियों पर ध्यान दीजिए।

आपकी परीक्षा है अकेलापन और कठोरता। ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारी लेकर आप ख़ुद को थका लेते हैं, और शुरुआत के बाद काम में ढील भी आ सकती है।

जो शुरू किया है उसे उसी लगन से पूरा कीजिए। सूर्य को जल, गणेश जी का स्मरण और रविवार को ज़रूरतमंद को भोजन कराना आपके लिए शुभ है। यह संकेत बाक़ी योगों के साथ मिलकर ही अपना पूरा रूप लेता है।

  • •नक्षत्र का सार: स्वामी सूर्य, देवता विश्वेदेव, चिह्न हाथी का दाँत या मचान, राशि धनु और मकर
  • •आपकी शक्तियाँ: ईमानदारी, सिद्धांत, धैर्य, नेतृत्व और देर से पर स्थायी सफलता पाने की क्षमता
  • •ध्यान रखने योग्य: कठोरता, अकेलापन, ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारी और बीच रास्ते ढील दे देना
  • •आपके लिए उपयुक्त काम: प्रशासन, सरकारी सेवा, क़ानून और न्याय, सेना, प्रबंधन, शिक्षण और शोध
  • •आपके लिए सलाह: आपकी जीत पक्की है, बस रास्ते में साथ चलने वालों का हाथ न छोड़िए

यह पाठ वही लिखा हुआ विवरण है जो LifeAstroAPI के narrative endpoints इस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर लौटाते हैं।

विशेषताएँ

स्वामी ग्रहसूर्य
विंशोत्तरी दशाइस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर सूर्य की 6 वर्ष की महादशा से जीवन आरंभ
देवताVishvadevas
चिह्नelephant tusk
विस्तार266.67° – 280° (सायन-रहित, निरयण)
राशिधनु और मकर
गणमनुष्य
नाड़ीअंत्य
योनिGodhaa
तत्त्वJal
रज्जुNabhi
नक्षत्र शूलदक्षिण दिशा की यात्रा टाली जाती है

चार चरण

हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, हर चरण 3°20′ का। हर चरण एक नवांश (D9) राशि में पड़ता है। आपके चंद्रमा का चरण नक्षत्र के फल को और सूक्ष्म बनाता है।

चरण 1

नवांश: धनु

उत्तराषाढ़ा का पहला चरण: धनु नवांश, आशावाद और ज्ञान

आपका चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के पहले चरण में है। यह चरण धनु नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी गुरु हैं। इसलिए सिद्धांत और धैर्य वाले आपके उत्तराषाढ़ा स्वभाव पर गुरु का आशावाद, ज्ञान की प्यास और धर्म-भाव का असर साफ़ दिखता है। यह वर्गोत्तम चरण है, यानी आपका चंद्रमा राशि और नवांश दोनों में धनु में है। इससे चंद्रमा को विशेष बल मिलता है और इस नक्षत्र के गुण आपमें ज़्यादा साफ़ और स्थिर रूप में दिख सकते हैं।

यह चरण आपको ऊँचा सोचने वाला बनाता है। काम में शिक्षण, सलाह, क़ानून, धर्म, प्रकाशन और विदेश से जुड़े क्षेत्र आपको रास आते हैं। धन के मामले में भाग्य अक्सर साथ देता है, पर खुले हाथ का खर्च और जोखिम भी हो सकता है। रिश्तों में आप ईमानदार और हँसमुख साथी हैं, पर बंधन का अहसास बेचैन कर सकता है। सेहत में जाँघ, जिगर और वज़न का ध्यान रखिए। सच को थोड़ी नरमी के साथ कहिए। आम तौर पर यह असर दशा-काल में सबसे स्पष्ट देखा जाता है।

चरण 2

नवांश: मकर

उत्तराषाढ़ा का दूसरा चरण: मकर नवांश, अनुशासन और मेहनत

आपका चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के दूसरे चरण में है। यह चरण मकर नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी शनि हैं। इसलिए सिद्धांत और धैर्य वाले आपके उत्तराषाढ़ा स्वभाव पर शनि का अनुशासन, ज़िम्मेदारी और लंबी मेहनत का असर साफ़ दिखता है। यह वर्गोत्तम चरण है, यानी आपका चंद्रमा राशि और नवांश दोनों में मकर में है। इससे चंद्रमा को विशेष बल मिलता है और इस नक्षत्र के गुण आपमें ज़्यादा साफ़ और स्थिर रूप में दिख सकते हैं।

यह चरण आपको गंभीर और व्यावहारिक बनाता है। काम आपके जीवन का केंद्र है, प्रशासन, प्रबंधन, निर्माण और बड़े संगठनों में आप एक-एक सीढ़ी चढ़ते हैं, और सफलता उम्र के साथ बढ़ती है। धन आप किफ़ायत से जोड़ते हैं। रिश्तों में आप निभाने वाले हैं, पर प्यार जताने में कंजूसी अपनों को दूर कर सकती है। सेहत में घुटने, हड्डियाँ और उदासी का ध्यान रखिए। आराम को भी अपनी सूची का एक ज़रूरी काम मानिए। इसकी प्रवृत्ति ग्रहों के बल के अनुसार घटती-बढ़ती देखी जाती है।

चरण 3

नवांश: कुम्भ

उत्तराषाढ़ा का तीसरा चरण: कुंभ नवांश, अलग सोच और समाज-भाव

आपका चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के तीसरे चरण में है। यह चरण कुंभ नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी शनि हैं। इसलिए सिद्धांत और धैर्य वाले आपके उत्तराषाढ़ा स्वभाव पर शनि की अलग सोच, मित्रता और समाज के लिए कुछ करने की चाह का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपको भीड़ से अलग सोचने वाला बनाता है। काम में तकनीक, विज्ञान, शोध, समाज सेवा और बड़े समूहों से जुड़े क्षेत्र आपको रास आते हैं, और आपको आज़ादी चाहिए। धन अक्सर मित्रों और संपर्कों से आता है। रिश्तों में आप वफ़ादार दोस्त हैं, पर भावनाओं के बहुत पास आने पर पीछे हट सकते हैं। सेहत में टखने, रक्त-संचार और नींद का ध्यान रखिए। अपनों से रोज़ एक बात दिल की भी कीजिए। इसकी प्रवृत्ति ग्रहों के बल के अनुसार घटती-बढ़ती देखी जाती है।

चरण 4

नवांश: मीन

उत्तराषाढ़ा का चौथा चरण: मीन नवांश, करुणा और अध्यात्म

आपका चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चौथे चरण में है। यह चरण मीन नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी गुरु हैं। इसलिए सिद्धांत और धैर्य वाले आपके उत्तराषाढ़ा स्वभाव पर गुरु की करुणा, कल्पना और आध्यात्मिक झुकाव का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपको कोमल और भीतर की ओर देखने वाला बनाता है। काम में कला, इलाज, सेवा, अध्यात्म और विदेश या जल से जुड़े क्षेत्र आपको रास आते हैं। धन के मामले में आप उदार हैं, पर हिसाब में ढील नुक़सान करा सकती है। रिश्तों में आप समर्पित और क्षमाशील हैं, बस लोग आपकी नरमी का फ़ायदा उठा सकते हैं। सेहत में पैर, नींद और नशे से दूरी का ध्यान रखिए। पैसे और समय का लिखित हिसाब रखिए। यह फल कितना खुलेगा, इसकी संभावना ग्रह-बल पर टिकी रहती है।

सूर्य के स्वामित्व वाले अन्य नक्षत्र

अध्याय पढ़िए: नक्षत्र क्या हैं →

Frequently asked questions

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी सूर्य हैं। जिस व्यक्ति का चंद्रमा उत्तराषाढ़ा में हो, उसका जीवन विंशोत्तरी दशा में सूर्य की महादशा से आरंभ होता है, जो पूरी होने पर 6 वर्ष की होती है।

उत्तराषाढ़ा का गण और नाड़ी क्या है?

उत्तराषाढ़ा मनुष्य गण और अंत्य नाड़ी का नक्षत्र है। अष्टकूट मिलान में गण कूट के 6 और नाड़ी कूट के 8 अंक होते हैं।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र किस राशि में आता है?

उत्तराषाढ़ा निरयण राशिचक्र के 266.67° से 280° तक फैला है, जो धनु और मकर राशि में पड़ता है।

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