पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र
Purva Ashadha · 27 में से 20वाँ नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा जन्म नक्षत्र: अजेय आत्मविश्वास, जोशीला मन और मनाने की कला
इस नक्षत्र में जन्म
आपका जन्म नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा है, जिसे 'अपराजित' नक्षत्र कहा जाता है। इसके स्वामी शुक्र हैं और देवता अपस्, यानी जल। इसका चिह्न हाथी का दाँत या पंखा है। इसलिए आपके भीतर पानी जैसा प्रवाह और हार न मानने वाला आत्मविश्वास है। आप जिस बात पर यक़ीन करते हैं, उसे पूरे जोश से कहते हैं, और आपकी बातों में दूसरों को मना लेने की ताक़त है। आप आशावादी और स्वाभिमानी हैं।
काम में आप क़ानून, वक्तृत्व, शिक्षण, राजनीति, लेखन, कला, मनोरंजन, जल और समुद्र से जुड़े काम, यात्रा और मार्केटिंग में अच्छा करते हैं। आप लोगों में जोश भरना जानते हैं। धन और मित्र, दोनों आपको आसानी से मिलते हैं। रिश्तों में आप स्नेही और वफ़ादार हैं, पर अपनी बात से पीछे न हटना और सलाह न सुनना टकराव ला सकता है। सेहत में जाँघ, कूल्हे, गुर्दे और पानी से जुड़ी तकलीफ़ पर ध्यान दीजिए।
आपकी परीक्षा है ज़िद और अति आत्मविश्वास। बहस जीतने की धुन में आप कभी-कभी रिश्ता हार सकते हैं।
किसी की सलाह को आज़माकर देखिए, हर बार अपनी ही राह सही नहीं होती। माँ लक्ष्मी का स्मरण, बहते जल में दान और शुक्रवार को कन्याओं को मिठाई देना आपके लिए शुभ है। इसका संकेत दशा और गोचर के साथ बदलता रहता है।
- •नक्षत्र का सार: स्वामी शुक्र, देवता अपस् (जल), चिह्न हाथी का दाँत या पंखा, राशि धनु
- •आपकी शक्तियाँ: आत्मविश्वास, आशावाद, बोलने और मनाने की कला, स्वाभिमान और लोगों में जोश भरना
- •ध्यान रखने योग्य: ज़िद, सलाह न सुनना, बहस की आदत और ज़रूरत से ज़्यादा आत्मविश्वास
- •आपके लिए उपयुक्त काम: क़ानून, वक्तृत्व, शिक्षण, राजनीति, लेखन, कला, मार्केटिंग और जल से जुड़े काम
- •आपके लिए सलाह: पानी अपनी नरमी से पत्थर काटता है, आप भी ज़िद की जगह धीरज से ज़्यादा जीतेंगे
यह पाठ वही लिखा हुआ विवरण है जो LifeAstroAPI के narrative endpoints इस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर लौटाते हैं।
विशेषताएँ
चार चरण
हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, हर चरण 3°20′ का। हर चरण एक नवांश (D9) राशि में पड़ता है। आपके चंद्रमा का चरण नक्षत्र के फल को और सूक्ष्म बनाता है।
चरण 1
नवांश: सिंहपूर्वाषाढ़ा का पहला चरण: सिंह नवांश, स्वाभिमान और नेतृत्व
आपका चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के पहले चरण में है। यह चरण सिंह नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी सूर्य हैं। इसलिए आत्मविश्वास और मनाने की कला वाले आपके पूर्वाषाढ़ा स्वभाव पर सूर्य का तेज, स्वाभिमान और आगे रहने की चाह का असर साफ़ दिखता है।
यह चरण आपको नेतृत्व की ओर ले जाता है। काम में प्रशासन, प्रबंधन, मंच या अपना कारोबार आपको रास आता है, और किसी के अधीन घुटकर रहना कठिन लगता है। धन अच्छा आता है और शान से खर्च भी हो सकता है। रिश्तों में आप उदार और वफ़ादार हैं, बदले में सम्मान चाहते हैं। सेहत में दिल, रीढ़ और रक्तचाप का ध्यान रखिए। दूसरों को श्रेय देना सीखिए, आपका क़द इससे बढ़ता है। यह फल कितना खुलेगा, इसकी संभावना ग्रह-बल पर टिकी रहती है।
चरण 2
नवांश: कन्यापूर्वाषाढ़ा का दूसरा चरण: कन्या नवांश, बारीकी और सेवा
आपका चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के दूसरे चरण में है। यह चरण कन्या नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी बुध हैं। इसलिए आत्मविश्वास और मनाने की कला वाले आपके पूर्वाषाढ़ा स्वभाव पर बुध की बारीकी, विश्लेषण और सेवा का भाव का असर साफ़ दिखता है।
यह चरण आपको व्यवस्थित और मेहनती बनाता है। काम में हिसाब-किताब, चिकित्सा, शोध, संपादन और तकनीकी काम आपको रास आते हैं, और लोग आँख मूँदकर आप पर भरोसा कर सकते हैं। धन आप सोच-समझकर खर्च करते हैं। रिश्तों में आप ज़िम्मेदार हैं, पर साथी की कमियाँ गिनाने की आदत दूरी ला सकती है। सेहत में पेट, आँतें और चिंता का ध्यान रखिए। अस्सी प्रतिशत ठीक काम को पूरा मानना सीखिए। यह संकेत बाक़ी योगों के साथ मिलकर ही अपना पूरा रूप लेता है।
चरण 3
नवांश: तुलापूर्वाषाढ़ा का तीसरा चरण: तुला नवांश, संतुलन और रिश्ते
आपका चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तीसरे चरण में है। यह चरण तुला नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी शुक्र हैं। इसलिए आत्मविश्वास और मनाने की कला वाले आपके पूर्वाषाढ़ा स्वभाव पर शुक्र का संतुलन, शिष्टता और रिश्तों की समझ का असर साफ़ दिखता है।
यह चरण आपको मिलनसार और न्यायप्रिय बनाता है। काम में साझेदारी, सलाहकारी, क़ानून, कला और लोगों के बीच रहने वाले काम आपको रास आते हैं। धन अक्सर साझेदार या जीवनसाथी के सहयोग से बढ़ता है, और सुंदर चीज़ों पर खर्च हो सकता है। रिश्ते आपके जीवन का केंद्र हैं, पर सबको ख़ुश रखने में आप अपनी बात दबा सकते हैं। सेहत में गुर्दे, कमर और त्वचा का ध्यान रखिए। छोटे फैसलों के लिए ख़ुद को समय-सीमा दीजिए। इसकी प्रवृत्ति हर कुंडली में अलग मात्रा में दिखती है।
चरण 4
नवांश: वृश्चिकपूर्वाषाढ़ा का चौथा चरण: वृश्चिक नवांश, गहराई और इच्छाशक्ति
आपका चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चौथे चरण में है। यह चरण वृश्चिक नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी मंगल हैं। इसलिए आत्मविश्वास और मनाने की कला वाले आपके पूर्वाषाढ़ा स्वभाव पर मंगल की गहराई, तीव्र भावनाएँ और अटूट इच्छाशक्ति का असर साफ़ दिखता है।
यह चरण आपको गंभीर और भीतर से मज़बूत बनाता है। काम में शोध, जाँच, इलाज, बीमा और संकट सँभालने वाले क्षेत्र आपको रास आते हैं, जहाँ दूसरे घबराते हैं वहाँ आप टिकते हैं। धन आप चुपचाप जोड़ते हैं, और साझे धन या विरासत से लाभ हो सकता है। रिश्तों में आप बेहद वफ़ादार हैं, पर शक और जलन रिश्ते को झुलसा सकती है। सेहत में मूत्र-तंत्र और दबे तनाव का ध्यान रखिए। जो मन में है उसे किसी भरोसेमंद से कह दीजिए। आम तौर पर यह असर दशा-काल में सबसे स्पष्ट देखा जाता है।
शुक्र के स्वामित्व वाले अन्य नक्षत्र
Frequently asked questions
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी शुक्र हैं। जिस व्यक्ति का चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा में हो, उसका जीवन विंशोत्तरी दशा में शुक्र की महादशा से आरंभ होता है, जो पूरी होने पर 20 वर्ष की होती है।
पूर्वाषाढ़ा का गण और नाड़ी क्या है?
पूर्वाषाढ़ा मनुष्य गण और मध्य नाड़ी का नक्षत्र है। अष्टकूट मिलान में गण कूट के 6 और नाड़ी कूट के 8 अंक होते हैं।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र किस राशि में आता है?
पूर्वाषाढ़ा निरयण राशिचक्र के 253.33° से 266.67° तक फैला है, जो धनु राशि में पड़ता है।
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