मूल नक्षत्र
Mula · 27 में से 19वाँ नक्षत्र
मूल जन्म नक्षत्र: जड़ तक जाने की आदत, निडर मन, आध्यात्मिक झुकाव
इस नक्षत्र में जन्म
आपका जन्म नक्षत्र मूल है, जिसका अर्थ है 'जड़'। इसके स्वामी केतु हैं और देवी निर्ऋति, जो विनाश और नए आरंभ की देवी हैं। इसका चिह्न बँधी हुई जड़ों का गुच्छा है। इसलिए आप किसी भी बात की सतह पर नहीं रुकते, सीधे जड़ तक जाते हैं। आप निडर, खोजी और सच के पक्के हैं। आपके जीवन में कुछ चीज़ें जड़ से उखड़ती हैं, और हर बार आप पहले से गहरी जड़ें जमाकर उठते हैं।
काम में आप शोध, चिकित्सा, आयुर्वेद और जड़ी-बूटी, दर्शन, अध्यात्म, ज्योतिष, जाँच-पड़ताल, क़ानून और सुधार के कामों में अच्छा करते हैं। आपको वही काम रास आता है जिसमें कोई गहरा अर्थ हो। धन में अचानक चढ़ाव और उतार दोनों आ सकते हैं। रिश्तों में आप ईमानदार हैं, पर आपकी बेलाग बात और अलग-थलग रहने की आदत अपनों को चुभ सकती है। सेहत में कूल्हे, जाँघ, पैर और नसों पर ध्यान दीजिए।
आपकी परीक्षा है तोड़-फोड़ की प्रवृत्ति। जो ठीक नहीं लगता, उसे आप एक झटके में ख़त्म कर देते हैं, और कभी-कभी बाद में पछताते हैं।
कुछ भी छोड़ने से पहले एक रात रुकिए। गणेश जी की आराधना, जो हर आरंभ के देवता हैं, और ध्यान-साधना आपके लिए सबसे अच्छा उपाय है। माता-पिता और बड़ों की सेवा भी आपके लिए शुभ है।
- •नक्षत्र का सार: स्वामी केतु, देवी निर्ऋति, चिह्न जड़ों का गुच्छा, राशि धनु
- •आपकी शक्तियाँ: गहरी खोज, निडरता, सच्चाई, आध्यात्मिक झुकाव और हर बार नए सिरे से खड़े होना
- •ध्यान रखने योग्य: एक झटके में सब छोड़ देना, कड़वी साफ़गोई, अलग-थलग रहना और बेचैनी
- •आपके लिए उपयुक्त काम: शोध, चिकित्सा, आयुर्वेद, दर्शन और अध्यात्म, ज्योतिष, जाँच-पड़ताल और क़ानून
- •आपके लिए सलाह: जो उखड़ा, उसने नई जगह बनाई है, अपने जीवन के बदलावों को इसी भरोसे से देखिए
यह पाठ वही लिखा हुआ विवरण है जो LifeAstroAPI के narrative endpoints इस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर लौटाते हैं।
विशेषताएँ
चार चरण
हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, हर चरण 3°20′ का। हर चरण एक नवांश (D9) राशि में पड़ता है। आपके चंद्रमा का चरण नक्षत्र के फल को और सूक्ष्म बनाता है।
चरण 1
नवांश: मेषमूल का पहला चरण: मेष नवांश, साहस और पहल
आपका चंद्रमा मूल नक्षत्र के पहले चरण में है। यह चरण मेष नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी मंगल हैं। इसलिए जड़ तक जाने की आदत और निडरता वाले आपके मूल स्वभाव पर मंगल की आग, साहस और पहल करने की जल्दी का असर साफ़ दिखता है। यह चरण गंडांत के पास पड़ता है, यानी जल और अग्नि राशि की संधि पर। ऐसे में भावनाएँ ज़्यादा गहरी हो सकती हैं, और जीवन के शुरुआती वर्षों में कुछ उतार-चढ़ाव के बाद आप भीतर से बहुत मज़बूत बनते हैं। जन्म के समय नक्षत्र शांति करा लेना शुभ माना जाता है।
यह चरण आपको कर्मठ बनाता है। काम में आप शुरुआत करने वाले हैं, नेतृत्व और जोखिम वाले काम आपको रास आते हैं। धन आप अपने दम पर कमाते हैं, पर जल्दबाज़ी में खर्च भी हो सकता है। रिश्तों में आप सच्चे हैं, बस ग़ुस्से में कही बात बाद में भारी पड़ सकती है। सेहत में सिर, रक्तचाप और चोट का ध्यान रखिए। बड़ा फैसला एक रात रुककर लीजिए। इसका संकेत दशा और गोचर के साथ बदलता रहता है।
चरण 2
नवांश: वृषभमूल का दूसरा चरण: वृष नवांश, स्थिरता और सुख
आपका चंद्रमा मूल नक्षत्र के दूसरे चरण में है। यह चरण वृष नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी शुक्र हैं। इसलिए जड़ तक जाने की आदत और निडरता वाले आपके मूल स्वभाव पर शुक्र की स्थिरता, धैर्य और सुख-सुविधा की चाह का असर साफ़ दिखता है।
यह चरण आपको टिकाऊ बनाता है। काम में आप धीरे पर पक्का चलते हैं और जो शुरू करते हैं उसे पूरा करते हैं। धन जोड़ना और संपत्ति बनाना आपको आता है, और अच्छा भोजन व आरामदायक घर आपको सुख देता है। रिश्तों में आप वफ़ादार हैं, पर ज़िद और अधिकार जताना खटक सकता है। सेहत में गला, वज़न और मीठे की अति का ध्यान रखिए। इसकी प्रवृत्ति ग्रहों के बल के अनुसार घटती-बढ़ती देखी जाती है।
चरण 3
नवांश: मिथुनमूल का तीसरा चरण: मिथुन नवांश, बुद्धि और बातचीत
आपका चंद्रमा मूल नक्षत्र के तीसरे चरण में है। यह चरण मिथुन नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी बुध हैं। इसलिए जड़ तक जाने की आदत और निडरता वाले आपके मूल स्वभाव पर बुध की चपलता, बुद्धि और बातचीत का हुनर का असर साफ़ दिखता है।
यह चरण आपके दिमाग़ और ज़ुबान को तेज़ करता है। काम में लिखना, बोलना, बेचना, सिखाना या व्यापार आपको रास आता है, और आप एक साथ कई काम सँभाल लेते हैं। धन अक्सर एक से ज़्यादा स्रोत से आता है। रिश्तों में आप दोस्त जैसे साथी हैं, पर आपका ध्यान जल्दी भटक सकता है। सेहत में नसें, कंधे और नींद का ध्यान रखिए। रोज़ के तीन ज़रूरी काम पहले निपटाएँ। इसका संकेत दशा और गोचर के साथ बदलता रहता है।
चरण 4
नवांश: कर्कमूल का चौथा चरण: कर्क नवांश, ममता और संवेदना
आपका चंद्रमा मूल नक्षत्र के चौथे चरण में है। यह चरण कर्क नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी चंद्रमा हैं। इसलिए जड़ तक जाने की आदत और निडरता वाले आपके मूल स्वभाव पर चंद्रमा की कोमलता, ममता और घर-परिवार से लगाव का असर साफ़ दिखता है।
यह चरण आपको भावुक और पालने वाला बनाता है। काम में सेवा, देखभाल, शिक्षा, खान-पान या जनता से जुड़े क्षेत्र आपको रास आते हैं। धन आप बचाकर रखते हैं और घर-ज़मीन में लगाना पसंद करते हैं। रिश्तों में आप पूरे मन से जुड़ते हैं, पर छोटी बात पर आहत होकर चुप हो सकते हैं। सेहत में पेट, सीना और मन के उतार-चढ़ाव का ध्यान रखिए। मन भारी हो तो किसी अपने से कह दीजिए। आम तौर पर यह असर दशा-काल में सबसे स्पष्ट देखा जाता है।
केतु के स्वामित्व वाले अन्य नक्षत्र
Frequently asked questions
मूल नक्षत्र का स्वामी कौन है?
मूल नक्षत्र के स्वामी केतु हैं। जिस व्यक्ति का चंद्रमा मूल में हो, उसका जीवन विंशोत्तरी दशा में केतु की महादशा से आरंभ होता है, जो पूरी होने पर 7 वर्ष की होती है।
मूल का गण और नाड़ी क्या है?
मूल राक्षस गण और Aadi नाड़ी का नक्षत्र है। अष्टकूट मिलान में गण कूट के 6 और नाड़ी कूट के 8 अंक होते हैं।
मूल नक्षत्र किस राशि में आता है?
मूल निरयण राशिचक्र के 240° से 253.33° तक फैला है, जो धनु राशि में पड़ता है।
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