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अश्विनी नक्षत्र

Ashwini · 27 में से 1वाँ नक्षत्र

अश्विनी जन्म नक्षत्र: तेज़ रफ़्तार, मदद का स्वभाव और नई शुरुआत

इस नक्षत्र में जन्म

आपका जन्म नक्षत्र अश्विनी है, जो सत्ताईस नक्षत्रों में पहला है। इसके स्वामी केतु हैं और देवता अश्विनी कुमार, जो देवताओं के वैद्य माने जाते हैं। इसका चिह्न घोड़े का सिर है। इसलिए आपके स्वभाव में घोड़े जैसी फुर्ती है। आप सोचते बाद में हैं, चल पहले पड़ते हैं। किसी को तकलीफ़ में देखकर आप बिना कहे मदद को पहुँच जाते हैं, और आपके हाथ में ठीक करने का हुनर है।

काम में आप वहाँ चमकते हैं जहाँ तेज़ी और तुरंत फैसला चाहिए, जैसे चिकित्सा, आपात सेवा, खेल, वाहन, यात्रा या नया कारोबार। धन आप जल्दी कमाते हैं, और जल्दबाज़ी में गँवा भी सकते हैं। रिश्तों में आप सच्चे और जोशीले हैं, पर बँधकर रहना आपको अखरता है और साथी को आपकी अधीरता चुभ सकती है। सेहत में सिर, माथे की चोट और नसों की थकान पर ध्यान दीजिए।

आपकी परीक्षा है काम को अंत तक ले जाना। शुरुआत आपकी शानदार होती है, पर बीच रास्ते मन किसी नई चीज़ पर चला जाता है।

एक समय में एक ही बड़ा लक्ष्य रखें और उसे पूरा करके ही अगला उठाइए। गणेश जी और अश्विनी कुमारों का स्मरण, और किसी बीमार की सेवा, आपके लिए शुभ है। इसकी प्रवृत्ति ग्रहों के बल के अनुसार घटती-बढ़ती देखी जाती है।

  • •नक्षत्र का सार: स्वामी केतु, देवता अश्विनी कुमार, चिह्न घोड़े का सिर, राशि मेष
  • •आपकी शक्तियाँ: फुर्ती, साहस, मदद का भाव, ठीक करने का हुनर और हर बार नए सिरे से शुरू करने की ताक़त
  • •ध्यान रखने योग्य: जल्दबाज़ी, अधूरे काम, ज़िद और बिना सोचे जोखिम उठाना
  • •आपके लिए उपयुक्त काम: चिकित्सा, आपात सेवा, खेल, वाहन और यात्रा, सेना और नया उद्यम
  • •आपके लिए सलाह: रफ़्तार आपकी ताक़त है, उसमें थोड़ा ठहराव जोड़ लें तो मंज़िल पक्की है

यह पाठ वही लिखा हुआ विवरण है जो LifeAstroAPI के narrative endpoints इस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर लौटाते हैं।

विशेषताएँ

स्वामी ग्रहकेतु
विंशोत्तरी दशाइस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर केतु की 7 वर्ष की महादशा से जीवन आरंभ
देवताAshwini Kumaras
चिह्नhorse's head
विस्तार0° – 13.33° (सायन-रहित, निरयण)
राशिमेष
गणदेव
नाड़ीAadi
योनिAshva
तत्त्वAgni
रज्जुPada
नक्षत्र शूलपूर्व दिशा की यात्रा टाली जाती है

चार चरण

हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, हर चरण 3°20′ का। हर चरण एक नवांश (D9) राशि में पड़ता है। आपके चंद्रमा का चरण नक्षत्र के फल को और सूक्ष्म बनाता है।

चरण 1

नवांश: मेष

अश्विनी का पहला चरण: मेष नवांश, साहस और पहल

आपका चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र के पहले चरण में है। यह चरण मेष नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी मंगल हैं। इसलिए फुर्ती और मदद करने की आदत वाले आपके अश्विनी स्वभाव पर मंगल की आग, साहस और पहल करने की जल्दी का असर साफ़ दिखता है। यह वर्गोत्तम चरण है, यानी आपका चंद्रमा राशि और नवांश दोनों में मेष में है। इससे चंद्रमा को विशेष बल मिलता है और इस नक्षत्र के गुण आपमें ज़्यादा साफ़ और स्थिर रूप में दिख सकते हैं।

यह चरण आपको कर्मठ बनाता है। काम में आप शुरुआत करने वाले हैं, नेतृत्व और जोखिम वाले काम आपको रास आते हैं। धन आप अपने दम पर कमाते हैं, पर जल्दबाज़ी में खर्च भी हो सकता है। रिश्तों में आप सच्चे हैं, बस ग़ुस्से में कही बात बाद में भारी पड़ सकती है। सेहत में सिर, रक्तचाप और चोट का ध्यान रखिए। बड़ा फैसला एक रात रुककर लीजिए। इसकी प्रवृत्ति ग्रहों के बल के अनुसार घटती-बढ़ती देखी जाती है।

चरण 2

नवांश: वृषभ

अश्विनी का दूसरा चरण: वृष नवांश, स्थिरता और सुख

आपका चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र के दूसरे चरण में है। यह चरण वृष नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी शुक्र हैं। इसलिए फुर्ती और मदद करने की आदत वाले आपके अश्विनी स्वभाव पर शुक्र की स्थिरता, धैर्य और सुख-सुविधा की चाह का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपको टिकाऊ बनाता है। काम में आप धीरे पर पक्का चलते हैं और जो शुरू करते हैं उसे पूरा करते हैं। धन जोड़ना और संपत्ति बनाना आपको आता है, और अच्छा भोजन व आरामदायक घर आपको सुख देता है। रिश्तों में आप वफ़ादार हैं, पर ज़िद और अधिकार जताना खटक सकता है। सेहत में गला, वज़न और मीठे की अति का ध्यान रखिए। यह संकेत बाक़ी योगों के साथ मिलकर ही अपना पूरा रूप लेता है।

चरण 3

नवांश: मिथुन

अश्विनी का तीसरा चरण: मिथुन नवांश, बुद्धि और बातचीत

आपका चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र के तीसरे चरण में है। यह चरण मिथुन नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी बुध हैं। इसलिए फुर्ती और मदद करने की आदत वाले आपके अश्विनी स्वभाव पर बुध की चपलता, बुद्धि और बातचीत का हुनर का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपके दिमाग़ और ज़ुबान को तेज़ करता है। काम में लिखना, बोलना, बेचना, सिखाना या व्यापार आपको रास आता है, और आप एक साथ कई काम सँभाल लेते हैं। धन अक्सर एक से ज़्यादा स्रोत से आता है। रिश्तों में आप दोस्त जैसे साथी हैं, पर आपका ध्यान जल्दी भटक सकता है। सेहत में नसें, कंधे और नींद का ध्यान रखिए। रोज़ के तीन ज़रूरी काम पहले निपटाएँ। आम तौर पर यही प्रवृत्ति जीवन के उस क्षेत्र में पहले दिखाई देती है।

चरण 4

नवांश: कर्क

अश्विनी का चौथा चरण: कर्क नवांश, ममता और संवेदना

आपका चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र के चौथे चरण में है। यह चरण कर्क नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी चंद्रमा हैं। इसलिए फुर्ती और मदद करने की आदत वाले आपके अश्विनी स्वभाव पर चंद्रमा की कोमलता, ममता और घर-परिवार से लगाव का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपको भावुक और पालने वाला बनाता है। काम में सेवा, देखभाल, शिक्षा, खान-पान या जनता से जुड़े क्षेत्र आपको रास आते हैं। धन आप बचाकर रखते हैं और घर-ज़मीन में लगाना पसंद करते हैं। रिश्तों में आप पूरे मन से जुड़ते हैं, पर छोटी बात पर आहत होकर चुप हो सकते हैं। सेहत में पेट, सीना और मन के उतार-चढ़ाव का ध्यान रखिए। मन भारी हो तो किसी अपने से कह दीजिए। इसकी प्रवृत्ति हर कुंडली में अलग मात्रा में दिखती है।

केतु के स्वामित्व वाले अन्य नक्षत्र

अध्याय पढ़िए: नक्षत्र क्या हैं →

Frequently asked questions

अश्विनी नक्षत्र का स्वामी कौन है?

अश्विनी नक्षत्र के स्वामी केतु हैं। जिस व्यक्ति का चंद्रमा अश्विनी में हो, उसका जीवन विंशोत्तरी दशा में केतु की महादशा से आरंभ होता है, जो पूरी होने पर 7 वर्ष की होती है।

अश्विनी का गण और नाड़ी क्या है?

अश्विनी देव गण और Aadi नाड़ी का नक्षत्र है। अष्टकूट मिलान में गण कूट के 6 और नाड़ी कूट के 8 अंक होते हैं।

अश्विनी नक्षत्र किस राशि में आता है?

अश्विनी निरयण राशिचक्र के 0° से 13.33° तक फैला है, जो मेष राशि में पड़ता है।

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