रेवती नक्षत्र
Revati · 27 में से 27वाँ नक्षत्र
रेवती जन्म नक्षत्र: कोमल हृदय, रक्षा का भाव, यात्रा में कृपा
इस नक्षत्र में जन्म
आपका जन्म नक्षत्र रेवती है, जो सत्ताईस नक्षत्रों में अंतिम है। इसके स्वामी बुध हैं और देवता पूषन, जो यात्रियों, पशुओं और राह भटके लोगों के रक्षक हैं। इसका चिह्न मछली या ढोल है। इसलिए आपका हृदय बहुत कोमल और पालने वाला है। आप किसी का दुख नहीं देख पाते, और कमज़ोर, बच्चों व जानवरों के लिए आपके मन में ख़ास जगह है। आप मिलनसार, कल्पनाशील और भीतर से आध्यात्मिक हैं।
काम में आप कला, संगीत, लेखन, शिक्षण, चिकित्सा, देखभाल, पशु-सेवा, यात्रा, होटल, अध्यात्म और समाज सेवा में अच्छा करते हैं। आपको अक्सर दूर देश या यात्रा से लाभ मिलता है। धन के मामले में आप भाग्यशाली हैं, पर उदारता में हिसाब ढीला पड़ सकता है। रिश्तों में आप स्नेही और समर्पित हैं, पर जल्दी आहत होना और दूसरों पर बहुत निर्भर हो जाना आपको कमज़ोर करता है। सेहत में पैर, टखने, पेट और रोग-प्रतिरोध पर ध्यान दीजिए।
आपकी परीक्षा है ज़रूरत से ज़्यादा कोमलता। लोग आपकी भलमनसाहत का फ़ायदा उठा सकते हैं, और आप दूसरों का बोझ अपना मान लेते हैं।
मदद कीजिए, पर अपनी सीमा भी तय रखिए। भगवान विष्णु का स्मरण, पशु-पक्षियों को दाना-पानी और यात्रियों की मदद आपके लिए बहुत शुभ है। इसका फल मिलने की संभावना संबंधित ग्रह की दशा में बढ़ जाती है।
- •नक्षत्र का सार: स्वामी बुध, देवता पूषन, चिह्न मछली या ढोल, राशि मीन
- •आपकी शक्तियाँ: कोमल हृदय, रक्षा और पालन का भाव, कल्पनाशीलता, मिलनसार स्वभाव और सहज भाग्य
- •ध्यान रखने योग्य: जल्दी आहत होना, दूसरों पर निर्भरता, भोलापन और अपनी सीमा तय न कर पाना
- •आपके लिए उपयुक्त काम: कला, संगीत, लेखन, शिक्षण, चिकित्सा और देखभाल, पशु-सेवा, यात्रा और अध्यात्म
- •आपके लिए सलाह: आप दूसरों की यात्रा आसान करते हैं, अपनी राह पर भी उतनी ही कोमलता से चलिए
यह पाठ वही लिखा हुआ विवरण है जो LifeAstroAPI के narrative endpoints इस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर लौटाते हैं।
विशेषताएँ
चार चरण
हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, हर चरण 3°20′ का। हर चरण एक नवांश (D9) राशि में पड़ता है। आपके चंद्रमा का चरण नक्षत्र के फल को और सूक्ष्म बनाता है।
चरण 1
नवांश: धनुरेवती का पहला चरण: धनु नवांश, आशावाद और ज्ञान
आपका चंद्रमा रेवती नक्षत्र के पहले चरण में है। यह चरण धनु नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी गुरु हैं। इसलिए कोमलता और रक्षा के भाव वाले आपके रेवती स्वभाव पर गुरु का आशावाद, ज्ञान की प्यास और धर्म-भाव का असर साफ़ दिखता है।
यह चरण आपको ऊँचा सोचने वाला बनाता है। काम में शिक्षण, सलाह, क़ानून, धर्म, प्रकाशन और विदेश से जुड़े क्षेत्र आपको रास आते हैं। धन के मामले में भाग्य अक्सर साथ देता है, पर खुले हाथ का खर्च और जोखिम भी हो सकता है। रिश्तों में आप ईमानदार और हँसमुख साथी हैं, पर बंधन का अहसास बेचैन कर सकता है। सेहत में जाँघ, जिगर और वज़न का ध्यान रखिए। सच को थोड़ी नरमी के साथ कहिए। इसकी प्रवृत्ति ग्रहों के बल के अनुसार घटती-बढ़ती देखी जाती है।
चरण 2
नवांश: मकररेवती का दूसरा चरण: मकर नवांश, अनुशासन और मेहनत
आपका चंद्रमा रेवती नक्षत्र के दूसरे चरण में है। यह चरण मकर नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी शनि हैं। इसलिए कोमलता और रक्षा के भाव वाले आपके रेवती स्वभाव पर शनि का अनुशासन, ज़िम्मेदारी और लंबी मेहनत का असर साफ़ दिखता है।
यह चरण आपको गंभीर और व्यावहारिक बनाता है। काम आपके जीवन का केंद्र है, प्रशासन, प्रबंधन, निर्माण और बड़े संगठनों में आप एक-एक सीढ़ी चढ़ते हैं, और सफलता उम्र के साथ बढ़ती है। धन आप किफ़ायत से जोड़ते हैं। रिश्तों में आप निभाने वाले हैं, पर प्यार जताने में कंजूसी अपनों को दूर कर सकती है। सेहत में घुटने, हड्डियाँ और उदासी का ध्यान रखिए। आराम को भी अपनी सूची का एक ज़रूरी काम मानिए। आम तौर पर यह असर दशा-काल में सबसे स्पष्ट देखा जाता है।
चरण 3
नवांश: कुम्भरेवती का तीसरा चरण: कुंभ नवांश, अलग सोच और समाज-भाव
आपका चंद्रमा रेवती नक्षत्र के तीसरे चरण में है। यह चरण कुंभ नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी शनि हैं। इसलिए कोमलता और रक्षा के भाव वाले आपके रेवती स्वभाव पर शनि की अलग सोच, मित्रता और समाज के लिए कुछ करने की चाह का असर साफ़ दिखता है।
यह चरण आपको भीड़ से अलग सोचने वाला बनाता है। काम में तकनीक, विज्ञान, शोध, समाज सेवा और बड़े समूहों से जुड़े क्षेत्र आपको रास आते हैं, और आपको आज़ादी चाहिए। धन अक्सर मित्रों और संपर्कों से आता है। रिश्तों में आप वफ़ादार दोस्त हैं, पर भावनाओं के बहुत पास आने पर पीछे हट सकते हैं। सेहत में टखने, रक्त-संचार और नींद का ध्यान रखिए। अपनों से रोज़ एक बात दिल की भी कीजिए। यह फल कितना खुलेगा, इसकी संभावना ग्रह-बल पर टिकी रहती है।
चरण 4
नवांश: मीनरेवती का चौथा चरण: मीन नवांश, करुणा और अध्यात्म
आपका चंद्रमा रेवती नक्षत्र के चौथे चरण में है। यह चरण मीन नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी गुरु हैं। इसलिए कोमलता और रक्षा के भाव वाले आपके रेवती स्वभाव पर गुरु की करुणा, कल्पना और आध्यात्मिक झुकाव का असर साफ़ दिखता है। यह वर्गोत्तम चरण है, यानी आपका चंद्रमा राशि और नवांश दोनों में मीन में है। इससे चंद्रमा को विशेष बल मिलता है और इस नक्षत्र के गुण आपमें ज़्यादा साफ़ और स्थिर रूप में दिख सकते हैं।
यह चरण आपको कोमल और भीतर की ओर देखने वाला बनाता है। काम में कला, इलाज, सेवा, अध्यात्म और विदेश या जल से जुड़े क्षेत्र आपको रास आते हैं। धन के मामले में आप उदार हैं, पर हिसाब में ढील नुक़सान करा सकती है। रिश्तों में आप समर्पित और क्षमाशील हैं, बस लोग आपकी नरमी का फ़ायदा उठा सकते हैं। सेहत में पैर, नींद और नशे से दूरी का ध्यान रखिए। पैसे और समय का लिखित हिसाब रखिए। इसका फल मिलने की संभावना संबंधित ग्रह की दशा में बढ़ जाती है।
बुध के स्वामित्व वाले अन्य नक्षत्र
Frequently asked questions
रेवती नक्षत्र का स्वामी कौन है?
रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध हैं। जिस व्यक्ति का चंद्रमा रेवती में हो, उसका जीवन विंशोत्तरी दशा में बुध की महादशा से आरंभ होता है, जो पूरी होने पर 17 वर्ष की होती है।
रेवती का गण और नाड़ी क्या है?
रेवती देव गण और अंत्य नाड़ी का नक्षत्र है। अष्टकूट मिलान में गण कूट के 6 और नाड़ी कूट के 8 अंक होते हैं।
रेवती नक्षत्र किस राशि में आता है?
रेवती निरयण राशिचक्र के 346.67° से 360° तक फैला है, जो मीन राशि में पड़ता है।
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