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रोहिणी नक्षत्र

Rohini · 27 में से 4वाँ नक्षत्र

रोहिणी जन्म नक्षत्र: आकर्षक व्यक्तित्व, रचनात्मक मन और सुख-समृद्धि का योग

इस नक्षत्र में जन्म

आपका जन्म नक्षत्र रोहिणी है, जो चंद्रमा का सबसे प्रिय नक्षत्र माना जाता है। इसके स्वामी चंद्रमा हैं और देवता ब्रह्मा, जो सृष्टि के रचयिता हैं। इसका चिह्न बैलगाड़ी या रथ है। इसलिए आपमें एक सहज आकर्षण है। आपकी आँखें, आपकी मुस्कान और आपकी मीठी बात लोगों को पास खींचती है। आप सुंदर चीज़ों के पारखी हैं और जो छूते हैं, उसे बढ़ा देते हैं।

काम में आप कला, संगीत, फ़ैशन, सौंदर्य, खेती, खान-पान, होटल, ज़मीन-जायदाद और विलासिता के व्यापार में अच्छा करते हैं। धन और सुख-सुविधा का योग आपके साथ चलता है। रिश्तों में आप स्नेही और रोमांटिक हैं, पर अपनों पर अधिकार जताने और जलन की आदत हो सकती है। सेहत में गला, चेहरा, मुँह और सर्दी-खाँसी पर ध्यान दीजिए, और मन का असर शरीर पर जल्दी पड़ता है।

आपकी परीक्षा है भौतिक सुखों से ज़्यादा लगाव और ज़िद। जो चाहिए, वह चाहिए ही, यह भाव आपको बेचैन कर सकता है।

जो आपके पास है उसके लिए रोज़ कृतज्ञता मानिए। भगवान कृष्ण का स्मरण, सोमवार को दूध या चावल का दान और पेड़-पौधे लगाना आपके लिए शुभ है। इसकी प्रवृत्ति हर कुंडली में अलग मात्रा में दिखती है।

  • •नक्षत्र का सार: स्वामी चंद्रमा, देवता ब्रह्मा, चिह्न बैलगाड़ी या रथ, राशि वृष
  • •आपकी शक्तियाँ: आकर्षण, मधुर वाणी, रचनात्मकता, स्थिर मन और चीज़ों को बढ़ाने-सँवारने का हुनर
  • •ध्यान रखने योग्य: अधिकार जताना, जलन, ज़िद, भोग की अति और आलोचना पर जल्दी आहत होना
  • •आपके लिए उपयुक्त काम: कला और संगीत, फ़ैशन, सौंदर्य, खेती, होटल, खान-पान और ज़मीन-जायदाद
  • •आपके लिए सलाह: आपकी सबसे बड़ी पूँजी आपका शांत मन है, उसे तुलना और जलन से बचाकर रखिए

यह पाठ वही लिखा हुआ विवरण है जो LifeAstroAPI के narrative endpoints इस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर लौटाते हैं।

विशेषताएँ

स्वामी ग्रहचंद्र
विंशोत्तरी दशाइस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर चंद्र की 10 वर्ष की महादशा से जीवन आरंभ
देवताBrahma
चिह्नchariot / banyan
विस्तार40° – 53.33° (सायन-रहित, निरयण)
राशिवृषभ
गणमनुष्य
नाड़ीअंत्य
योनिSarpa
तत्त्वVayu
रज्जुKantha
नक्षत्र शूलदक्षिण दिशा की यात्रा टाली जाती है

चार चरण

हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, हर चरण 3°20′ का। हर चरण एक नवांश (D9) राशि में पड़ता है। आपके चंद्रमा का चरण नक्षत्र के फल को और सूक्ष्म बनाता है।

चरण 1

नवांश: मेष

रोहिणी का पहला चरण: मेष नवांश, साहस और पहल

आपका चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र के पहले चरण में है। यह चरण मेष नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी मंगल हैं। इसलिए आकर्षण और रचनात्मकता वाले आपके रोहिणी स्वभाव पर मंगल की आग, साहस और पहल करने की जल्दी का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपको कर्मठ बनाता है। काम में आप शुरुआत करने वाले हैं, नेतृत्व और जोखिम वाले काम आपको रास आते हैं। धन आप अपने दम पर कमाते हैं, पर जल्दबाज़ी में खर्च भी हो सकता है। रिश्तों में आप सच्चे हैं, बस ग़ुस्से में कही बात बाद में भारी पड़ सकती है। सेहत में सिर, रक्तचाप और चोट का ध्यान रखिए। बड़ा फैसला एक रात रुककर लीजिए। इसका संकेत दशा और गोचर के साथ बदलता रहता है।

चरण 2

नवांश: वृषभ

रोहिणी का दूसरा चरण: वृष नवांश, स्थिरता और सुख

आपका चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र के दूसरे चरण में है। यह चरण वृष नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी शुक्र हैं। इसलिए आकर्षण और रचनात्मकता वाले आपके रोहिणी स्वभाव पर शुक्र की स्थिरता, धैर्य और सुख-सुविधा की चाह का असर साफ़ दिखता है। यह वर्गोत्तम चरण है, यानी आपका चंद्रमा राशि और नवांश दोनों में वृष में है। इससे चंद्रमा को विशेष बल मिलता है और इस नक्षत्र के गुण आपमें ज़्यादा साफ़ और स्थिर रूप में दिख सकते हैं।

यह चरण आपको टिकाऊ बनाता है। काम में आप धीरे पर पक्का चलते हैं और जो शुरू करते हैं उसे पूरा करते हैं। धन जोड़ना और संपत्ति बनाना आपको आता है, और अच्छा भोजन व आरामदायक घर आपको सुख देता है। रिश्तों में आप वफ़ादार हैं, पर ज़िद और अधिकार जताना खटक सकता है। सेहत में गला, वज़न और मीठे की अति का ध्यान रखिए। इसकी प्रवृत्ति ग्रहों के बल के अनुसार घटती-बढ़ती देखी जाती है।

चरण 3

नवांश: मिथुन

रोहिणी का तीसरा चरण: मिथुन नवांश, बुद्धि और बातचीत

आपका चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र के तीसरे चरण में है। यह चरण मिथुन नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी बुध हैं। इसलिए आकर्षण और रचनात्मकता वाले आपके रोहिणी स्वभाव पर बुध की चपलता, बुद्धि और बातचीत का हुनर का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपके दिमाग़ और ज़ुबान को तेज़ करता है। काम में लिखना, बोलना, बेचना, सिखाना या व्यापार आपको रास आता है, और आप एक साथ कई काम सँभाल लेते हैं। धन अक्सर एक से ज़्यादा स्रोत से आता है। रिश्तों में आप दोस्त जैसे साथी हैं, पर आपका ध्यान जल्दी भटक सकता है। सेहत में नसें, कंधे और नींद का ध्यान रखिए। रोज़ के तीन ज़रूरी काम पहले निपटाएँ। आम तौर पर यही प्रवृत्ति जीवन के उस क्षेत्र में पहले दिखाई देती है।

चरण 4

नवांश: कर्क

रोहिणी का चौथा चरण: कर्क नवांश, ममता और संवेदना

आपका चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र के चौथे चरण में है। यह चरण कर्क नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी चंद्रमा हैं। इसलिए आकर्षण और रचनात्मकता वाले आपके रोहिणी स्वभाव पर चंद्रमा की कोमलता, ममता और घर-परिवार से लगाव का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपको भावुक और पालने वाला बनाता है। काम में सेवा, देखभाल, शिक्षा, खान-पान या जनता से जुड़े क्षेत्र आपको रास आते हैं। धन आप बचाकर रखते हैं और घर-ज़मीन में लगाना पसंद करते हैं। रिश्तों में आप पूरे मन से जुड़ते हैं, पर छोटी बात पर आहत होकर चुप हो सकते हैं। सेहत में पेट, सीना और मन के उतार-चढ़ाव का ध्यान रखिए। मन भारी हो तो किसी अपने से कह दीजिए। यह संकेत बाक़ी योगों के साथ मिलकर ही अपना पूरा रूप लेता है।

चंद्र के स्वामित्व वाले अन्य नक्षत्र

अध्याय पढ़िए: नक्षत्र क्या हैं →

Frequently asked questions

रोहिणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?

रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्र हैं। जिस व्यक्ति का चंद्रमा रोहिणी में हो, उसका जीवन विंशोत्तरी दशा में चंद्र की महादशा से आरंभ होता है, जो पूरी होने पर 10 वर्ष की होती है।

रोहिणी का गण और नाड़ी क्या है?

रोहिणी मनुष्य गण और अंत्य नाड़ी का नक्षत्र है। अष्टकूट मिलान में गण कूट के 6 और नाड़ी कूट के 8 अंक होते हैं।

रोहिणी नक्षत्र किस राशि में आता है?

रोहिणी निरयण राशिचक्र के 40° से 53.33° तक फैला है, जो वृषभ राशि में पड़ता है।

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