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पुष्य नक्षत्र

Pushya · 27 में से 8वाँ नक्षत्र

पुष्य जन्म नक्षत्र: सबसे शुभ नक्षत्र, पालने वाला स्वभाव, धर्म में आस्था

इस नक्षत्र में जन्म

आपका जन्म नक्षत्र पुष्य है, जिसे सत्ताईस नक्षत्रों में सबसे शुभ माना जाता है। इसके स्वामी शनि हैं और देवता बृहस्पति, यानी देवताओं के गुरु। इसका चिह्न गाय का थन या कमल है, यानी वह जो पोषण देता है। इसलिए आपका स्वभाव दूसरों को पालने, सँभालने और सहारा देने का है। आप शांत, धार्मिक, ज़िम्मेदार और अपने नियमों पर चलने वाले हैं। लोग आपके पास आकर सुरक्षित महसूस करते हैं।

काम में आप शिक्षण, सलाहकारी, प्रशासन, क़ानून, धर्म, समाज सेवा, खान-पान, डेयरी और देखभाल से जुड़े क्षेत्रों में अच्छा करते हैं। आपकी तरक़्क़ी धीमी पर पक्की होती है। धन मेहनत से जुड़ता है और टिकता है। रिश्तों में आप निभाने वाले और परिवार को जोड़कर रखने वाले हैं, पर अपने नियम दूसरों पर थोपने की आदत खटक सकती है। सेहत में सीना, पेट, फेफड़े और हड्डियों पर ध्यान दीजिए।

आपकी परीक्षा है कट्टरता और दूसरों के लिए ख़ुद को भूल जाना। आप सबको देते हैं, पर ख़ुद के लिए माँगने में संकोच करते हैं।

अपनी ज़रूरत को भी उतनी ही जगह दीजिए। गुरुजनों की सेवा, गुरुवार को पीली वस्तु या अन्न का दान और गाय को चारा देना आपके लिए बहुत शुभ है। इसकी प्रवृत्ति ग्रहों के बल के अनुसार घटती-बढ़ती देखी जाती है।

  • •नक्षत्र का सार: स्वामी शनि, देवता बृहस्पति, चिह्न गाय का थन या कमल, राशि कर्क
  • •आपकी शक्तियाँ: पालने-सँभालने का भाव, धैर्य, धर्म में आस्था, ज़िम्मेदारी और भरोसेमंद स्वभाव
  • •ध्यान रखने योग्य: अपने नियम थोपना, कट्टरता, दूसरों के लिए ख़ुद को थका देना और ज़िद
  • •आपके लिए उपयुक्त काम: शिक्षण, सलाहकारी, प्रशासन, क़ानून, समाज सेवा, डेयरी और खान-पान
  • •आपके लिए सलाह: आप सबका सहारा हैं, पर ख़ाली बर्तन से किसी को कुछ नहीं दिया जा सकता, ख़ुद को भी भरें

यह पाठ वही लिखा हुआ विवरण है जो LifeAstroAPI के narrative endpoints इस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर लौटाते हैं।

विशेषताएँ

स्वामी ग्रहशनि
विंशोत्तरी दशाइस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर शनि की 19 वर्ष की महादशा से जीवन आरंभ
देवताBrihaspati
चिह्नcow's udder / lotus
विस्तार93.33° – 106.67° (सायन-रहित, निरयण)
राशिकर्क
गणदेव
नाड़ीमध्य
योनिMesha
तत्त्वVayu
रज्जुNabhi
नक्षत्र शूलपश्चिम दिशा की यात्रा टाली जाती है

चार चरण

हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, हर चरण 3°20′ का। हर चरण एक नवांश (D9) राशि में पड़ता है। आपके चंद्रमा का चरण नक्षत्र के फल को और सूक्ष्म बनाता है।

चरण 1

नवांश: सिंह

पुष्य का पहला चरण: सिंह नवांश, स्वाभिमान और नेतृत्व

आपका चंद्रमा पुष्य नक्षत्र के पहले चरण में है। यह चरण सिंह नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी सूर्य हैं। इसलिए पालने-सँभालने के भाव और धर्म-निष्ठा वाले आपके पुष्य स्वभाव पर सूर्य का तेज, स्वाभिमान और आगे रहने की चाह का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपको नेतृत्व की ओर ले जाता है। काम में प्रशासन, प्रबंधन, मंच या अपना कारोबार आपको रास आता है, और किसी के अधीन घुटकर रहना कठिन लगता है। धन अच्छा आता है और शान से खर्च भी हो सकता है। रिश्तों में आप उदार और वफ़ादार हैं, बदले में सम्मान चाहते हैं। सेहत में दिल, रीढ़ और रक्तचाप का ध्यान रखिए। दूसरों को श्रेय देना सीखिए, आपका क़द इससे बढ़ता है। आम तौर पर यह असर दशा-काल में सबसे स्पष्ट देखा जाता है।

चरण 2

नवांश: कन्या

पुष्य का दूसरा चरण: कन्या नवांश, बारीकी और सेवा

आपका चंद्रमा पुष्य नक्षत्र के दूसरे चरण में है। यह चरण कन्या नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी बुध हैं। इसलिए पालने-सँभालने के भाव और धर्म-निष्ठा वाले आपके पुष्य स्वभाव पर बुध की बारीकी, विश्लेषण और सेवा का भाव का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपको व्यवस्थित और मेहनती बनाता है। काम में हिसाब-किताब, चिकित्सा, शोध, संपादन और तकनीकी काम आपको रास आते हैं, और लोग आँख मूँदकर आप पर भरोसा कर सकते हैं। धन आप सोच-समझकर खर्च करते हैं। रिश्तों में आप ज़िम्मेदार हैं, पर साथी की कमियाँ गिनाने की आदत दूरी ला सकती है। सेहत में पेट, आँतें और चिंता का ध्यान रखिए। अस्सी प्रतिशत ठीक काम को पूरा मानना सीखिए। यह संकेत बाक़ी योगों के साथ मिलकर ही अपना पूरा रूप लेता है।

चरण 3

नवांश: तुला

पुष्य का तीसरा चरण: तुला नवांश, संतुलन और रिश्ते

आपका चंद्रमा पुष्य नक्षत्र के तीसरे चरण में है। यह चरण तुला नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी शुक्र हैं। इसलिए पालने-सँभालने के भाव और धर्म-निष्ठा वाले आपके पुष्य स्वभाव पर शुक्र का संतुलन, शिष्टता और रिश्तों की समझ का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपको मिलनसार और न्यायप्रिय बनाता है। काम में साझेदारी, सलाहकारी, क़ानून, कला और लोगों के बीच रहने वाले काम आपको रास आते हैं। धन अक्सर साझेदार या जीवनसाथी के सहयोग से बढ़ता है, और सुंदर चीज़ों पर खर्च हो सकता है। रिश्ते आपके जीवन का केंद्र हैं, पर सबको ख़ुश रखने में आप अपनी बात दबा सकते हैं। सेहत में गुर्दे, कमर और त्वचा का ध्यान रखिए। छोटे फैसलों के लिए ख़ुद को समय-सीमा दीजिए। इसका संकेत दशा और गोचर के साथ बदलता रहता है।

चरण 4

नवांश: वृश्चिक

पुष्य का चौथा चरण: वृश्चिक नवांश, गहराई और इच्छाशक्ति

आपका चंद्रमा पुष्य नक्षत्र के चौथे चरण में है। यह चरण वृश्चिक नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी मंगल हैं। इसलिए पालने-सँभालने के भाव और धर्म-निष्ठा वाले आपके पुष्य स्वभाव पर मंगल की गहराई, तीव्र भावनाएँ और अटूट इच्छाशक्ति का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपको गंभीर और भीतर से मज़बूत बनाता है। काम में शोध, जाँच, इलाज, बीमा और संकट सँभालने वाले क्षेत्र आपको रास आते हैं, जहाँ दूसरे घबराते हैं वहाँ आप टिकते हैं। धन आप चुपचाप जोड़ते हैं, और साझे धन या विरासत से लाभ हो सकता है। रिश्तों में आप बेहद वफ़ादार हैं, पर शक और जलन रिश्ते को झुलसा सकती है। सेहत में मूत्र-तंत्र और दबे तनाव का ध्यान रखिए। जो मन में है उसे किसी भरोसेमंद से कह दीजिए। यह संकेत बाक़ी योगों के साथ मिलकर ही अपना पूरा रूप लेता है।

शनि के स्वामित्व वाले अन्य नक्षत्र

अध्याय पढ़िए: नक्षत्र क्या हैं →

Frequently asked questions

पुष्य नक्षत्र का स्वामी कौन है?

पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि हैं। जिस व्यक्ति का चंद्रमा पुष्य में हो, उसका जीवन विंशोत्तरी दशा में शनि की महादशा से आरंभ होता है, जो पूरी होने पर 19 वर्ष की होती है।

पुष्य का गण और नाड़ी क्या है?

पुष्य देव गण और मध्य नाड़ी का नक्षत्र है। अष्टकूट मिलान में गण कूट के 6 और नाड़ी कूट के 8 अंक होते हैं।

पुष्य नक्षत्र किस राशि में आता है?

पुष्य निरयण राशिचक्र के 93.33° से 106.67° तक फैला है, जो कर्क राशि में पड़ता है।

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किसी भी शहर के लिए चंद्रमा कब पुष्य में है, या जन्म नक्षत्र उसके चरण और स्वामी सहित, एक ही कॉल में पाइए।

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