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पुनर्वसु नक्षत्र

Punarvasu · 27 में से 7वाँ नक्षत्र

पुनर्वसु जन्म नक्षत्र: फिर उठ खड़े होने की शक्ति, उदार मन

इस नक्षत्र में जन्म

आपका जन्म नक्षत्र पुनर्वसु है, जिसका अर्थ है 'फिर से शुभ होना'। इसके स्वामी गुरु हैं और देवी अदिति, जो देवताओं की माता और असीम आकाश की प्रतीक हैं। इसका चिह्न तरकश या धनुष है। भगवान राम का जन्म इसी नक्षत्र में हुआ माना जाता है। इसलिए आपके स्वभाव में सरलता, उदारता और हर बार लौटकर आने की ताक़त है। जीवन में जो खोया, वह किसी न किसी रूप में आपको फिर मिल जाता है।

काम में आप शिक्षण, लेखन, सलाहकारी, धर्म, यात्रा, होटल, घर-मकान और सेवा वाले क्षेत्रों में अच्छा करते हैं। आपको सादा और सार्थक काम पसंद है। धन ज़रूरत भर हमेशा रहता है, और आप थोड़े में संतुष्ट रह लेते हैं। रिश्तों में आप स्नेही और क्षमाशील हैं, घर-परिवार आपके लिए सबसे ऊपर है। सेहत में फेफड़े, कान, जिगर और वज़न पर ध्यान दीजिए।

आपकी परीक्षा है ज़रूरत से ज़्यादा सीधापन और महत्वाकांक्षा की कमी। आप संतोष में इतने सहज हो सकते हैं कि अपनी क्षमता का पूरा उपयोग ही न करें।

अपने लिए थोड़े ऊँचे लक्ष्य रखें और लोगों को परखकर भरोसा कीजिए। भगवान राम या विष्णु का स्मरण और गुरुवार को ज्ञान या अन्न का दान आपके लिए शुभ है। आम तौर पर यही प्रवृत्ति जीवन के उस क्षेत्र में पहले दिखाई देती है।

  • •नक्षत्र का सार: स्वामी गुरु, देवी अदिति, चिह्न तरकश, राशि मिथुन और कर्क
  • •आपकी शक्तियाँ: सरल स्वभाव, उदारता, क्षमा, संतोष और हर गिरावट के बाद फिर उठने की ताक़त
  • •ध्यान रखने योग्य: ज़रूरत से ज़्यादा भोलापन, टालमटोल, महत्वाकांक्षा की कमी और बार-बार जगह बदलना
  • •आपके लिए उपयुक्त काम: शिक्षण, लेखन, सलाहकारी, धर्म और अध्यात्म, यात्रा, होटल और घर-मकान
  • •आपके लिए सलाह: जो गया उसका शोक न करें, आपके नक्षत्र का वादा ही है कि अच्छा समय लौटता है

यह पाठ वही लिखा हुआ विवरण है जो LifeAstroAPI के narrative endpoints इस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर लौटाते हैं।

विशेषताएँ

स्वामी ग्रहगुरु
विंशोत्तरी दशाइस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर गुरु की 16 वर्ष की महादशा से जीवन आरंभ
देवताAditi
चिह्नbow and quiver
विस्तार80° – 93.33° (सायन-रहित, निरयण)
राशिमिथुन और कर्क
गणदेव
नाड़ीAadi
योनिMarjara
तत्त्वJal
रज्जुKantha
नक्षत्र शूलउत्तर दिशा की यात्रा टाली जाती है

चार चरण

हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, हर चरण 3°20′ का। हर चरण एक नवांश (D9) राशि में पड़ता है। आपके चंद्रमा का चरण नक्षत्र के फल को और सूक्ष्म बनाता है।

चरण 1

नवांश: मेष

पुनर्वसु का पहला चरण: मेष नवांश, साहस और पहल

आपका चंद्रमा पुनर्वसु नक्षत्र के पहले चरण में है। यह चरण मेष नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी मंगल हैं। इसलिए सरलता और फिर उठ खड़े होने की ताक़त वाले आपके पुनर्वसु स्वभाव पर मंगल की आग, साहस और पहल करने की जल्दी का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपको कर्मठ बनाता है। काम में आप शुरुआत करने वाले हैं, नेतृत्व और जोखिम वाले काम आपको रास आते हैं। धन आप अपने दम पर कमाते हैं, पर जल्दबाज़ी में खर्च भी हो सकता है। रिश्तों में आप सच्चे हैं, बस ग़ुस्से में कही बात बाद में भारी पड़ सकती है। सेहत में सिर, रक्तचाप और चोट का ध्यान रखिए। बड़ा फैसला एक रात रुककर लीजिए। इसका संकेत दशा और गोचर के साथ बदलता रहता है।

चरण 2

नवांश: वृषभ

पुनर्वसु का दूसरा चरण: वृष नवांश, स्थिरता और सुख

आपका चंद्रमा पुनर्वसु नक्षत्र के दूसरे चरण में है। यह चरण वृष नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी शुक्र हैं। इसलिए सरलता और फिर उठ खड़े होने की ताक़त वाले आपके पुनर्वसु स्वभाव पर शुक्र की स्थिरता, धैर्य और सुख-सुविधा की चाह का असर साफ़ दिखता है।

यह चरण आपको टिकाऊ बनाता है। काम में आप धीरे पर पक्का चलते हैं और जो शुरू करते हैं उसे पूरा करते हैं। धन जोड़ना और संपत्ति बनाना आपको आता है, और अच्छा भोजन व आरामदायक घर आपको सुख देता है। रिश्तों में आप वफ़ादार हैं, पर ज़िद और अधिकार जताना खटक सकता है। सेहत में गला, वज़न और मीठे की अति का ध्यान रखिए। यह संकेत बाक़ी योगों के साथ मिलकर ही अपना पूरा रूप लेता है।

चरण 3

नवांश: मिथुन

पुनर्वसु का तीसरा चरण: मिथुन नवांश, बुद्धि और बातचीत

आपका चंद्रमा पुनर्वसु नक्षत्र के तीसरे चरण में है। यह चरण मिथुन नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी बुध हैं। इसलिए सरलता और फिर उठ खड़े होने की ताक़त वाले आपके पुनर्वसु स्वभाव पर बुध की चपलता, बुद्धि और बातचीत का हुनर का असर साफ़ दिखता है। यह वर्गोत्तम चरण है, यानी आपका चंद्रमा राशि और नवांश दोनों में मिथुन में है। इससे चंद्रमा को विशेष बल मिलता है और इस नक्षत्र के गुण आपमें ज़्यादा साफ़ और स्थिर रूप में दिख सकते हैं।

यह चरण आपके दिमाग़ और ज़ुबान को तेज़ करता है। काम में लिखना, बोलना, बेचना, सिखाना या व्यापार आपको रास आता है, और आप एक साथ कई काम सँभाल लेते हैं। धन अक्सर एक से ज़्यादा स्रोत से आता है। रिश्तों में आप दोस्त जैसे साथी हैं, पर आपका ध्यान जल्दी भटक सकता है। सेहत में नसें, कंधे और नींद का ध्यान रखिए। रोज़ के तीन ज़रूरी काम पहले निपटाएँ। यह संकेत बाक़ी योगों के साथ मिलकर ही अपना पूरा रूप लेता है।

चरण 4

नवांश: कर्क

पुनर्वसु का चौथा चरण: कर्क नवांश, ममता और संवेदना

आपका चंद्रमा पुनर्वसु नक्षत्र के चौथे चरण में है। यह चरण कर्क नवांश में पड़ता है, जिसके स्वामी चंद्रमा हैं। इसलिए सरलता और फिर उठ खड़े होने की ताक़त वाले आपके पुनर्वसु स्वभाव पर चंद्रमा की कोमलता, ममता और घर-परिवार से लगाव का असर साफ़ दिखता है। यह वर्गोत्तम चरण है, यानी आपका चंद्रमा राशि और नवांश दोनों में कर्क में है। इससे चंद्रमा को विशेष बल मिलता है और इस नक्षत्र के गुण आपमें ज़्यादा साफ़ और स्थिर रूप में दिख सकते हैं।

यह चरण आपको भावुक और पालने वाला बनाता है। काम में सेवा, देखभाल, शिक्षा, खान-पान या जनता से जुड़े क्षेत्र आपको रास आते हैं। धन आप बचाकर रखते हैं और घर-ज़मीन में लगाना पसंद करते हैं। रिश्तों में आप पूरे मन से जुड़ते हैं, पर छोटी बात पर आहत होकर चुप हो सकते हैं। सेहत में पेट, सीना और मन के उतार-चढ़ाव का ध्यान रखिए। मन भारी हो तो किसी अपने से कह दीजिए। इसकी प्रवृत्ति ग्रहों के बल के अनुसार घटती-बढ़ती देखी जाती है।

गुरु के स्वामित्व वाले अन्य नक्षत्र

अध्याय पढ़िए: नक्षत्र क्या हैं →

Frequently asked questions

पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी कौन है?

पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी गुरु हैं। जिस व्यक्ति का चंद्रमा पुनर्वसु में हो, उसका जीवन विंशोत्तरी दशा में गुरु की महादशा से आरंभ होता है, जो पूरी होने पर 16 वर्ष की होती है।

पुनर्वसु का गण और नाड़ी क्या है?

पुनर्वसु देव गण और Aadi नाड़ी का नक्षत्र है। अष्टकूट मिलान में गण कूट के 6 और नाड़ी कूट के 8 अंक होते हैं।

पुनर्वसु नक्षत्र किस राशि में आता है?

पुनर्वसु निरयण राशिचक्र के 80° से 93.33° तक फैला है, जो मिथुन और कर्क राशि में पड़ता है।

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किसी भी शहर के लिए चंद्रमा कब पुनर्वसु में है, या जन्म नक्षत्र उसके चरण और स्वामी सहित, एक ही कॉल में पाइए।

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